Login
Lorem ipsum dolor sit amet, consectetur adipiscing elit. Morbi adipiscing gravdio, sit amet suscipit risus ultrices eu. Fusce viverra neque at purus laoreet consequa. Vivamus vulputate posuere nisl quis consequat.
Create an accountLost your password? Please enter your username and email address. You will receive a link to create a new password via email.
फाइलेरिया का घरेलू उपचार
फाइलेरिया बिमारी के कई अनà¥à¤¯ नाम à¤à¥€ हैं जैसे कि हाथीपाà¤à¤µ, फीलपाà¤à¤µ, शà¥à¤²à¥€à¤ªà¤¦ आदि. ये बिमारी उषà¥à¤£à¤•टिबंध देशों में सामानà¥à¤¯ है. इसकी उतà¥à¤ªà¤¤à¤¿ परजीवी (पेरेसिटिक) निमेटोड कीड़ों के कारण होता है जो छोटे धागों जैसे दिखते हैं. यह बीमारी फिलेरी वà¥à¤šà¤°à¥‡à¤°à¤¿à¤… बैंकà¥à¤°à¥‹à¤«à¥à¤Ÿà¥€, बà¥à¤°à¥‚गिआ मलाई और बà¥à¤°à¥‚गिआ टिमोरि नामक निमेटोड कीड़ो के कारण होती है. फाइलेरिया के सबसे ज़à¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ मामले वà¥à¤šà¤°à¥‡à¤°à¤¿à¤… बैंकà¥à¤°à¥‹à¤«à¥à¤Ÿà¥€ नामक परजीवी के कारण होते हैं. फाइलेरिया दà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ à¤à¤° में विकलांगता और विरूपता का सबसे बà¥à¤¾ कारण है.
यह ज़à¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾à¤¤à¤° गरीब लोगों को होता है कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि जहाठगरीब लोग रहते हैं वहाठमचà¥à¤›à¤°à¥‹à¤‚ की पà¥à¤°à¤œà¤¨à¤¨à¤¤à¤¾ अधिक होती है. à¤à¤²à¥€à¤«à¥‡à¤‚टिटिस यानि शà¥à¤²à¥€à¤ªà¤¦ जà¥à¤µà¤° à¤à¤• परजीवी के कारण फैलती है जो कि मचà¥à¤›à¤° के काटने से शरीर के अंदर पà¥à¤°à¤µà¥‡à¤¶ करता है. इस बीमारी से मरीज के पैर हाथी के पैरों की तरह फूल जाते हैं. इस रोग के होने से न केवल शारीरिक विकलांगता हो सकती है बलà¥à¤•ि मरीजों की मानसिक और आरà¥à¤¥à¤¿à¤• सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ à¤à¥€ बिगड़ सकती है
à¤à¤²à¥€à¤«à¥‡à¤‚टिटिस को लसीका फाइलेरिया à¤à¥€ कहा जाता है कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि फाइलेरिया शरीर की लसिका पà¥à¤°à¤£à¤¾à¤²à¥€ को पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ करता है. यह रोग मनà¥à¤·à¥à¤¯à¥‹à¤‚ के हाथ-पैरों के साथ ही जननांगों को à¤à¥€ पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ करता है. आइठफाइलेरिया को दूर करने के लिठउसके उपचार हेतॠकà¥à¤› घरेलू उपायों पर पà¥à¤°à¤•ाश डालें
लौंग
लौंग फाइलेरिया के उपचार के लिठबहà¥à¤¤ पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¥€ घरेलू नà¥à¤¸à¥à¤–ा है. लौंग में मौजूद à¤à¤‚जाइम परजीवी के पनपते ही उसे खतà¥à¤® कर देते हैं और बहà¥à¤¤ ही पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¥€ तरीके से परजीवी को रकà¥à¤¤ से नषà¥à¤Ÿ कर देते हैं. रोगी लौंग से तैयार चाय का सेवन कर सकते हैं
काले अखरोट का तेल
काले अखरोट के तेल को à¤à¤• कप गरà¥à¤® पानी में तीन से चार बूंदे डालकर पिà¤à¤‚. इस मितà¥à¤°à¤£ को दिन में दो बार पिया जा सकता है. अखरोट के अंदर मौजूद गà¥à¤£à¥‹à¤‚ से खून में मौजूद कीड़ों की संखà¥à¤¯à¤¾ कम होने लगती है और धीरे धीरे à¤à¤•दम खतà¥à¤® हो जाती है. जलà¥à¤¦ परिणाम के लिठकम से कम छह हफà¥à¤¤à¥‡ पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¦à¤¿à¤¨ इस उपाय को करें
à¤à¥‹à¤œà¤¨
फाइलेरिया के इलाज के लिठअपने रोज के खाने में कà¥à¤› आहार जैसे लहसà¥à¤¨, अनानास, मीठे आलू, शकरकंदी, गाजर और खà¥à¤¬à¤¾à¤¨à¥€ आदि शामिल करें. इनमें विटामिन ठहोता है और बैकà¥à¤Ÿà¤°à¥€à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ को मारने के लिठविशेष गà¥à¤£ à¤à¥€ होते हैं.
आंवला
आंवला में विटामिन सी पà¥à¤°à¤šà¥à¤° मातà¥à¤°à¤¾ में होता है. इसमें à¤à¤¨à¥à¤¥à¥‡à¤²à¤®à¤¿à¤‚थिंक à¤à¥€ होता है जो कि घाव को जलà¥à¤¦à¥€ à¤à¤°à¤¨à¥‡ में बेहद लाà¤à¤ªà¥à¤°à¤¦ है. आंवला को रोज खाने से इंफेकà¥à¤¶à¤¨ दूर रहता है
अशà¥à¤µà¤—ंधा
अशà¥à¤µà¤—ंधा शिलाजीत का मà¥à¤–à¥à¤¯ हिसà¥à¤¸à¤¾ है, जिसके आयà¥à¤°à¥à¤µà¥‡à¤¦ में बहà¥à¤¤ से उपयोग हैं. अशà¥à¤µà¤—ंधा को फाइलेरिया के इलाज के लिठà¤à¥€ इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² किया जाता है
बà¥à¤°à¤¾à¤¹à¥à¤®à¥€
बà¥à¤°à¤¾à¤¹à¥à¤®à¥€ पà¥à¤°à¤¾à¤¨à¥‡ समय से ही बहà¥à¤¤ सी बीमारियों के इलाज के लिठइसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² की जाती है. फाइलेरिया के इलाज के लिठबà¥à¤°à¤¾à¤¹à¥à¤®à¥€ को पीसकर उसका लेप लगाया जाता है. रोजाना à¤à¤¸à¤¾ करने से रोगी सूजन कम हो जाती है
अदरक
फाइलेरिया से निजात के लिठसूखे अदरक का पाउडर या सोंठका रोज गरम पानी से सेवन करें. इसके सेवन से शरीर में मौजूद परजीवी नषà¥à¤Ÿ होते हैं और मरीज को जलà¥à¤¦à¥€ ठीक होने में मदद मिलती है
शंखपà¥à¤·à¥à¤ªà¥€
फाइलेरिया के उपचार के लिठशंखपà¥à¤·à¥à¤ªà¥€ की जड़ को गरम पानी के साथ पीसकर पेसà¥à¤Ÿ तैयार करें. इस पेसà¥à¤Ÿ को पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ सà¥à¤¥à¤¾à¤¨ पर लगाà¤à¤‚. इससे सूजन कम होने में मदद मिलेगी
कà¥à¤²à¥à¤ ी
कà¥à¤²à¥à¤ ी या हॉरà¥à¤¸ गà¥à¤°à¤¾à¤® में चींटियों दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ निकाली गई मिटà¥à¤Ÿà¥€ और अंडे की सफेदी मिलाकर पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ सà¥à¤¥à¤¾à¤¨ पर लगाà¤à¤‚. इस लेप को पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¦à¤¿à¤¨ पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ सà¥à¤¥à¤¾à¤¨ पर लगाà¤à¤‚, सूजन से आराम मिलेगा
अगर
अगर को पानी के साथ मिलाकर लेप तैयार करें. इस लेप को पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¦à¤¿à¤¨ 20 मिनट के लिठदिन में दो बार पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ सà¥à¤¥à¤¾à¤¨ पर लगाà¤à¤‚. इससे घाव जलà¥à¤¦à¥€ à¤à¤°à¤¤à¥‡ हैं और सूजन कम होती है. घाव में मौजूद बैकà¥à¤Ÿà¥€à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ à¤à¥€ मर जाते हैं
रॉक सालà¥à¤Ÿ - शंखपà¥à¤·à¥à¤ªà¥€ और सौंठके पाउडर में रॉक सालà¥à¤Ÿ मिलाकर, à¤à¤• à¤à¤• चà¥à¤Ÿà¤•ी रोज दो बार गरम पानी के साथ लें.
| --------------------------- | --------------------------- |